इस हिंदी वार्ता में हम “Divine Inertia” का अर्थ समझते हैं जिसे श्री अरविन्द की वाणी में हम देखते हैं।
This brief reflection by Dr Alok Pandey is about the possibility of Jivanmukta beyond moksha.
यह संक्षिप्त हिंदी विचार निम्नतम प्रकृति को स्वीकार अथवा अस्वीकार करने के बारे में है।